in

आगा खाँ पैलेस-इतिहास, तथ्य, समय और स्थिति

पुणे के पुणे-अहमदनगर मार्ग पर, यरवदा के निकट ये पैलेस, सुल्तान मोहम्मद शाह आगा खान तृतीय ने बनवाया था|

Pune Darshan - Aga Khan Palace Pune

You Can Also Read This Story In: enEnglish (English)

सन् १८९२ में निर्मित आगा ख़ाँ पैलेस भारत की सर्वश्रेष्ठ कलाकृतियों में से एक है। पुणे के पुणे-अहमदनगर मार्ग पर, यरवदा के निकट ये पैलेस, सुल्तान मोहम्मद शाह आगा खान तृतीय ने बनवाया था। इसके निर्माण के पीछे, पुणे के आसपास के उन गरीब लोगो की सहायता करना था जो अकाल से बुरी तरह प्रभावित थे।

आगा खाँ पैलेस भारत के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के साथ जुड़ाव के कारण राष्ट्रीय महत्व भी रखता है। ये वो पैलेस है जहाँ सन् १९४२ से १९४४ के बीच महात्मा गांधी, उनकी पत्नी कस्तूरबा गांधी और उनके सचिव महादेव देसाई को नजरबंद कर दिया गया था। ये घटना भारत छोड़ो आंदोलन के एकदम बाद हुई। हालांकि कस्तूरबा गांधी और महादेव देसाई ने कैद के दौरान ही यहाँ अंतिम सांस ली। अब इस महल में उनकी समाधी/मकबरा स्थित है। सन् १९६९ में आगा खाँ चतुर्थ ने, गांधी और उनके सिद्धान्तों को श्रधांजलि देने के लिए, इसे भारत सरकार को भेंट कर दिया था।

इस महल का सौंदर्य महत्वपूर्ण रूप से उल्लेखनीय है। इसकी इटैलियन मेहराब शानदार घास का मैदान बहुत ही चित्ताकर्षक है। १९ एकड़ के दायरे में स्थित इस महल में ७ एकड़ का निर्मित भाग है। इसका कलात्मक वास्तुशिल्प और वैभव आपको सम्मोहित कर देगा। इस महल के निर्माण में ५ साल का समय लगा और लगभग १२ लाख रूपये की लागत आई। इसमें ५ विशालकाय कक्ष और महल के चारों और २.५ मीटर का गलियारा है जो इस महल का आकर्षण बिंदु है। साथ में इस महल में गांधी राष्ट्रीय स्मारक भी है जो महात्मा गांधी और अन्य स्वतंत्रता सेनानियो के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं पर, फोटोग्राफ और पेंटिंग के माध्यम से, प्रकाश डालता है। यहाँ गांधी जी के द्वारा पहने गए वस्त्र, कुछ बर्तन, भोजन करने की मेज, वो कमरे जहाँ वो ठहरे हुए थे, उनके पत्र आदि देखे जा सकते हैं। पूरी दुनिया से लोग यहाँ भारत  के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को सलामी देने आते हैं, जिन्होंने पूरे जीवन सत्य और अहिंसा के मार्ग को अपनाकर स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी।

गांधी राष्ट्रीय स्मारक समिति, जिसका मुख्यालय इसी पैलेस के अंदर है, इसकी देखभाल करती है। ये अनेक अवसरों जैसे गांधी जयंती (२ अक्टूबर), स्वतंत्रता दिवस (१५ अगस्त) और गणतंत्र दिवस (२६ जनवरी) पर जन-गतिविधियों का आयोजन भी करती है। यहाँ स्थित समाधी स्थल पर सुबह के समय प्रार्थना सभाओं का आयोजन भी किया जाता है जिसमे बहुत से लोग भाग लेते हैं। यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या में २ अक्टूबर के दिन खासी वृद्धि होती है, जब लोग महात्मा गांधी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करने आते हैं। साथ ही गांधी राष्ट्रीय स्मारक समिति यहाँ ‘खादी ग्रामोद्योग भंडार’ के नाम से एक दुकान भी चलाती है जिसमे खादी और हस्तनिर्मित वस्त्र बेचे जाते हैं। साथ ही जरूरतमंद लोगो की सहायता के लिए धूपबत्ती/अगरबत्ती, तैयार वस्त्र, कढ़ाई, मोमबत्ती, चॉक निर्माण आदि की कक्षाएं भी चलाई जाती हैं।

समय

आगा खाँ पैलेस प्रातः ९ बजे से शाम ६ बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है। यदि आप कभी यहाँ घूमने नहीं आए हैं तो आपको इसके सौंदर्य और विस्तृत रूप से जानने के लिए यहाँ जरूर आना चाहिए।

Written by Girlopedia Staff

Techie by profession blogger by hobby, founder of Girlopedia.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to Top
Close

Log In

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy

To use social login you have to agree with the storage and handling of your data by this website.

Close